जानें किस राशि के लिए शुभ होता है कौन-सा रत्न

1. कुंडली या राशि‍ के अनुसार रत्न

वैदिक ज्‍योतिष को मानने और समझने वाले रत्‍नों के महत्‍व को बहुत अच्‍छी तरह से जानते और समझते हैं। लेकिन बहुत से लोग इस बात को लेकर संशय में रहते हैं कि उन्‍हें रत्‍न किस आधार पर पहनना चाहिए और क्‍या रत्‍न पहनने से पहले किसी ज्‍योतिषाचार्य से परामर्श लेना जरूरी होता है। तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि रत्‍न, कुंडली के अनुसार पहनें या राशि‍ के अनुसार।

इस सभी बातों को समझने से पहले ये समझ लेना चाहिए कि रत्‍नों को धारण करने का आधार क्‍या है। वैदिक ज्‍योतिषाचार्यों ने बड़े शोध के बाद इस बात की जानकारी प्राप्‍त की है कि प्रत्‍येक रत्‍न किसी न किसी ग्रह से संब‍ंधित है। नवग्रहों से संबंधि‍त रत्‍नों को ही एकसाथ नवरत्‍न कहा जाता है और इन्‍हीं ग्रहों का संबंध हमारी कुंडली में बैठी राशियों से होता है। तो रत्‍नों के इस संसार को समझने से पहले रत्‍नों, ग्रहों और राशियों में संबंध को समझते हैं।

ऋषि-मुनियों और महर्षियों ने अपने अध्‍ययन के लिए पृथ्‍व‍ी के सापेक्ष काल्‍पनिक लाइनें खींचकर पूरे आकाश को 12 भागों में बांटा है। इन्‍हीं भागों को राशियां कहा जाता है। आकाश के सारे पिंड इन्‍हीं 12 राशियों में घूमते हैं जिनके आधार पर उनका आंकलन होता है और राशि में किसी ग्रह की स्थिति ही व्‍यक्ति के जीवन पर प्रभाव डालती है।

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