सेामवार के दिन ये उपाय करना आपके लिए रहेगा मंगलकारी

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चंद्रमा का रत्‍न

चंद्रमा का रत्‍न है मोती जो मन को नियंत्रित करता है। मोती रत्‍न धारण करने से मानसिक संतुलन ठीक रहता है और मन एकाग्र रह पाता है। मोती रत्‍न मन को एकाग्रता प्रदान करता है। चंद्रमा के रत्‍न मोती की ऊर्जा से आपके जीवन में संतुलन आता है और जीवन को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।

जन्‍मकुंडली में ग्रहों की स्थिति

ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि मोती रत्‍न को कोई भी, कभी भी और कैसे भी धारण कर सकता है। मोती रत्‍न धारण करने से पूर्व जन्‍मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और प्रभाव का विश्‍लेषण करना बहुत जरूरी होता है। इसलिए मोती रत्‍न धारण करने से पूर्व अपनी कुंडली का विश्‍लेषण अवश्‍य करवा लें। आप चाहें तो स्‍वयं भी अपनी कुंडली में चंद्रमा और अन्‍य ग्रहों की स्थिति को जानकर मोती रत्‍न धारण कर सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा निम्‍न परिस्थिति में है तो आपको मोती रत्‍न धारण करना चाहिए।

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सूर्य के साथ चंद्रमा

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यदि जन्‍मकुंडली में सूर्य के साथ चंद्रमा उपस्थित हो तो वह क्षीण होता है। इसके अलावा सूर्य से अगली पांच राशियों के पहले स्थित होने पर भी चंद्रमा क्षीण होता है। ऐसी स्थिति में मोती धारण करना चाहिए।

केंद्र में चंद्रमा

केंद्र में चंद्रमा हो तो उसे कम प्रभाव वाला या अप्रभावी मानते हैं। ऐसे में केंद्र में चंद्रमा होने पर भी मोती पहनना चाहिए। ऐसी स्थिति में मोती पहनने से जातक को किसी तरह का भय नहीं रहता।

धन भाव का स्‍वामी

दूसरे भाव अर्थात धन भाव का स्‍वामी यदि चंद्रमा हो तो यह कुंडली मिथुन लग्‍न में होगी। ऐसे में अगर चंद्रमा छठे भाव में बैठा हो तो मोती धारण करना बहुत उत्‍तम होता है।

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कुंडली में चंद्रमा

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जन्‍मकुंडली में अगर चंद्रमा पंचमेश होतर बारहवें भाव में हो या सप्‍तमेश होकर दूसरे भाव में हो, नवमेश होकर चतुर्थ भाव में हो, दशमेश होकर पंचम भाव में हो तथा एकादशेश होकर षष्‍ठम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्‍यक्ति को यथाशीघ्र मोती धारण कर लेना चाहिए।

वृश्चिक राशि में चंद्रमा

किसी भी कुंडली में अगर चंद्रमा वृश्‍चिक राशि का हो तो इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि वो किस भाव में है। ऐसे जातक को बिना विलंब मोती धारण करना चाहिए। इसी प्रकार चंद्रमा छठें, आठवें और बारहवें भाव में हो तो भी मोती धारण कर लेना चाहिए।

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चंद्रमा की दृष्टि

यदि चंद्रमा राहू, केतु, शनि और मंगल के साथ बैठा हो या इनकी दृष्‍टि चंद्रमा पर हो तो भी मोती धारण करना चंद्रमा के अच्‍छे फल देता है। चंद्रमा जिस भाव का स्‍वामी हो उससे छठे या आठवें स्‍थान में अगर वह स्‍थ‍ित हो तो भी मोती धारण करना चाहिए।

नीच का चंद्रमा

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अगर चंद्रमा नीच का हो, वक्री हो या अस्‍तगत हो, इसके अलावा चंद्रमा के साथ राहू के ग्रहण योग बना रहा हो तो भी मोती धारण कर लेना चाहिए। यदि विंशोत्‍तरी पद्धति से चंद्रमा की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो तो ऐसे व्‍यक्‍ति को भी मोती पहन लेना चाहिए।

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