रत्न धारण करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

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नियमों का पालन

रत्‍नशास्‍त्र के अनुसार रत्‍नों को धारण करने के पहले कुछ निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। रत्‍न आपके जीवन पर क्‍या प्रभाव डालेंगें ये इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे, किस दिन और किस समय धारण करते हैं।

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रत्‍न धारण करते समय निम्‍न बातों का ध्‍यान अवश्‍य रखना चाहिए।

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रत्‍न पहनते समय क्‍या करें और क्‍या न करें

किसी भी रत्‍न को दूध में डालें। अंगूठी को बस एक बार जल से धोकर पहन लें। रत्‍नों को दूध में भिगोकर रखने से रत्‍न उस दूध को सोख लेते हैं और दूध के कई कण रत्‍न को विकृत कर देते हैं इसलिए रत्‍नों को दूध में न भिगोएं।

कब करें रत्‍न धारण

रत्‍न को कभी भी 4, 9 और 14 तारीख को धारण न करें। जिस दिन रत्‍न धारण करें उस दिन गोचर का चंद्रमा आपकी राशि से 4,8 या 12वें भाव में नहीं होना चाहिए। इसके अलावा अमावस्‍या, संक्रांति और ग्रहण के दिन भी रत्‍न धारण नहीं करना चाहिए।

दिशा का रखें ध्‍यान

रत्‍न धारण करते समय सूर्य की ओर मुख रखें। रत्‍न को दोपहर से पहले सुबह के समय धारण करें।

कब बदलें रत्‍न

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मूंगा रत्‍न और मोती रत्‍न के अतिरिक्‍त अन्‍य सभी रत्‍न कभी बूढ़े नहीं होते। मोती की चमक कम होने और मूंगा पर खरोंच पड़ने पर उसे बदल देना चाहिए।

किस धातु में करें धारण

कीमती रत्‍नों को सोना और सस्‍ते रत्‍न जैसे मोती, मूंगा और उपरत्‍नों को चांदी या पंचधातु में धारण कर सकते हैं।

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